आँध्रप्रदेश के पुस्तकालयों में दक्खिनी साहित्य के बहुत- सी पुस्तकें उपलब्ध हैं । सभा ने दक्खिनी की छ: पुस्तकों का देवनागरी लिपि में प्रकाशन किया है जिसमें १. दक्खिनी का गद्य और पद्य २. सबरस ३. कुतुब्मुश्तरी ४. सैफुल -मुलक व बदीउल् जमा ५. मनसमझावन ६. कुल्लियात । विगत ३७ वर्षों से भारत सरकार के आर्थिक सहयोग से 'विवरण पत्रिका ' नामक मासिक पत्रिका को सभा नियमित रूप से प्रकाशित कर रही हैं । महाराष्ट्र हिंदी प्रचार सभा , औरंगाबाद से साहित्यिक , सांस्कृतिक संचारिका नामक पत्रिका का नियमित प्रकाशन किया जा रहा है । सन १९९३ वर्ष में साहित्य की विभिन्न विधायों पर संपन्न कार्य की प्रगति को रेखांकित करने के विचार से 'अजंता' नाम से वार्षिकी का प्रकाशन सभा ने किया हैं। जिसके पांच अंक प्रकाशित किये गये हैं ।

साहित्यिक गतिविधियाँ :-सभा के द्वारा समय-समय पर साहित्यिक गोष्ठियों, व्याख्यानों एवं शिविरों का आयोजन किया जाता हैं। दीक्षांत समारोह, सभा की गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण गतिविधि है । दीक्षांत समारोह, में भारत के प्रथम राष्ट्रपति महामहीम डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद के मार्गदर्शन से सभा लाभान्वित हुई है । यहाँ पर एक बात मैं बहुत गौरव के साथ कहना चाहूँगा कि महामहीम डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद के हांथो भूक्षण में सुवर्ण पदक विजेता बालक आज हमारी संस्था के आदरणीय अध्यक्ष डॉ॰ चंद्रदेव भगवंतराव कवडे जी हैं । दीक्षांत समारोह में सभा को बहुत ही महत्वपूर्ण साहित्यकार, राजनैतिक नेतायों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है, जिनमें भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री पी. वी. नरसिम्हाराव, डॉ॰ के . एल . श्रीमाली, श्री भीमसेन सच्चर, श्री के.जी.सय्यदैन, श्री ओंकारनाथ ठाकुर, आचार्य क्षितिमोहन सेन, डॉ॰ बाबुराम सक्सेना, श्री भक्तदर्शन, श्री रामधारी सिंह दिनकर, प्रो.रामलाल राही, पं. वदेमातरम रामचंद्रराव, सुप्रसिद्ध कवि श्री हरिवंशराय बच्चन, पूर्व गृहमंत्री एस.बी.चौहान, पूर्व राज्यपाल सुश्री कुमुद बेन जोशी, सुजीत सिंह बरनाला, श्री कृष्णकांत, रामेश्वर ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री, डॉ॰ एन. टी. रामाराव, श्रीमती सुषमा स्वराज, उ. प्र . के पूर्व राज्यपाल महामहीम श्री विष्णुकांत शास्त्री आदि ने दीक्षांत समारोह में भाग लेकर दीक्षांत भाषण दिया है ।

इस अवसर पर मैं भारत सरकार, आंध्रप्रदेश एवं कर्नाटक सरकारों के अतिरिक्त एन .सी . टी. ई. तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार के प्रति सभा कि ओर से आभार प्रकट करता हूँ, जिनका सहयोग सभा को निरंतर प्राप्त हो रहा है । भारत सरकार से विभिन्न प्रचार कार्यों के लिए केंद्रीय सभा एवं प्रादेशिक सभायों को जो अनुभव प्राप्त हो रहा है, उससे प्रचार कार्यों को बल मिल रहा है ।

जय हिंदी - जय नागरी




"यदि आप सफलता चाहते हैं तो इसे अपना लक्ष्य ना बनाइये, सिर्फ वो करिए जो करना आपको अच्छा लगता है और जिसमे आपको विश्वास है, और खुद-बखुद आपको सफलता मिलेगी|"

"सफल होने के लिए, सफलता की इच्छा, असफलता के भय से अधिक  होनी चाहिए|"